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Friday, 17 November 2017

क्या आप गुस्सा करते है? तो आप ये जरूर पढ़िए।

ये कहानी बहुत पुरानी अमेरिका की culture की है। जहाँ पहले गोरे ओर काले लोगों बीच तनाव रहता था।

एक american एक रेस्टोरेंट में गया। उसने कोने में एक  African को बैठे हुए देखा। अमेरिकन आदमी गुस्से से चिलाया ओर बोला उस काले हब्शी आदमी के सिवा यहाँ जोभी है उसे मेरी तरफ से ख़ाना free।
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वेयतर ने उस आदमी के पास से पैसे लेके उस काले आदमी के सिवा सबको खाना दिया। लेकिन वो black आदमी बिना अपना संतुलन गुमाये बिना, विचलित ना होके उसने उस गोरेमैन को smile के साथ "thank you" कहाँ।

ये सुन के वो गोरा आदमी ओर ज्यादा ग़ुस्से में आ गया। उसके दिमाग़ के तार हिल गए। उसने वेयतर को जोर से आवाज़ दी और बोला की उस काले आदमी के सिवा सभी को शराब दो ये लो सारे पैसे। 


वेयतर ने जैसे ही order पूरा किया वो हब्शी ने फिरसे उस गोरे आदमी को फिर से धन्यवाद किया।

लेकिन अब तो वो अमेरिकन पूरे का पूरा आग बबूला हो गया था। उसने वेयतर को बुलाया और पूछा कि वो काला आदमी क्या पागल हो गया है। इसको क्या हो गया है। मेने उनके सिवा सभी को शराब और खाना खिलाया, मेने उनकी इतनी बेज्जती की फ़िर भी वो मुझे बार बार thank u बोल रहा है। इसका दिमाग तो ठीक है?


Waiter ने धिरे से कहा वो sir वो पागल नही है। ये काला आदमी, ये हब्शी ही इस रेस्टोरेंट का मालिक owner है।

ये short story से ये knowledge मिलता है कि हमे कभी भी गुस्सा नही करना चाहिए। ग़ुस्सा करने से एक ही आदमी का बुरा होता है ओर वो है खुद का। "अगर आप सही है तो गुस्सा करने की जरूरत नही है ओर अगर आप जूठे है तो आप को गुस्सा करने का कोई अधिकार नही है"।

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Tuesday, 14 November 2017

क्या आप जानते है ईश्वर कहा है? Moral short story in hindi

बहोत पुरानी प्रेरणादायक कहानी Moral short story है। 


एक छोटे से नगर में एक राजा रहता था। जो बहुत ही दयालु, विवेकी और आर्दश राजा था। उसके राज्य में सभी लोग खुशी से रहते थे। एक दिन अपने सेनापति के साथ बाग में घूमते घूमते अचानक से सोच में पड़ गए।



ये देख के सेनापति ने राजा से पूछा। हजूर क्या हुवा आप कौनसी सोच में दुबे हुए है?

राजा ने कहाँ, सेनापति मुझे तीन प्रश्नो के उत्तर नही मिल रहे। 1) ईश्वर कहाँ रहता है? 2) वो किस तरफ़ देखता है? 3) और वो क्या करता है?


ये सुन सेनापति ने मुस्कराहट के साथ जवाब दिया। जहाँ पनाह ये तीनो प्रश्नों के जवाब बहुत कठिन है। जवाब देने के लिए मुजे सुबह तक वक़्त दीजिए, में आप के सारे सवालों के उत्तर दुगा।

उसके बाद सेनापति अपने घर चले गए। अपने पिता को चिंतित अवस्था मे देख के उसकी छोटी बेटी "देवशेना" ने पूछा क्या हुवा। पिता ने राजा के तीन सवालो की बात की। देवशेना ने कहा कि में जवाब दूँगी। ये सुन के सेनापति पिता बहोत खुश हुए। सेनापति अपनी बेटी को लेके दूसरे दिन महाराज के दरबार मे हाज़िर हुए।

सेनापति ने दरबार मे अपनी बेटी का परिचय दिया। और राजा से कहा कि ये छोटी लड़की ही आपके तीनो प्रश्न के उत्तर देगी।

देवशेना ने कहा मुझे थोड़ा दूध चाहिए । देवशेना को दूध दिया गया । उसने राजा से पूछा "मखन किसमे से बनता है"? राजा ने कहा दही में से। और "दही किसमे से बनता है"? राजा ने कहा दूध में से। तब देवशेना ने कहा, जिस तरह, मखन दूध में है, लेकिन दिखता नही इस तरह ईश्वर भी सभी जगहों पे है, लेकिन दिखाई नहीं देते। ये है आपके पहले प्रश्न का उत्तर।
राजा के सिंहासन के पास दीपक जल रहा था ये देख के देवशेना ने कहा, ये दीपक की ज्योति किस तरफ देख रही है अर्थात दीपक का प्रकाश किस तरफ़ फैल रहा है? आपकी तरफ या मेरी तरफ़? राजा ने कहा ये सभी दिशाओं में प्रकाशित हो रही है। देवशेना ने कहा आपके दूसरे सवाल का जवाब ये है कि जिस तरह ज्योत सभी दिशाओं में प्रकाशित हो रही है, उस तरह भगवान भी सभी दिशाओं में देख के सभी लोगों का कल्याण करता है।


अब छोटी लड़की बोली अब आपको तीसरे प्रश्न का उत्तर चाहिए तो आपको मेरे साथ ज़मीन पे बैठना होगा। राजा बात मान गए। लेकिन जैसे ही राजा जमीं पे बैठे, तुंरत ही छोटी लड़की ने कूद के राजा के सिंहासन पे बैठ गई। लड़की का ऐसा व्यवहार देख के सभी आश्चर्य चकित हो गए। देवशेना कोई राजकुमारी हो, इस अदा से उसने राजा से पूछा कि क्या मिल गया आपके तीसरे सवाल का जवाब?

राजा ने ना में अपनी गरदन हिलाई। तब छोटी लड़की ने जवाब दिया, मेरी जैसी निम्न कक्षा की लड़की को ईश्वर सिंहासन पे बिठाता है और सिहासन के मालिक के जमी पे। ये सभी कुछ भगवान तो कर रहा है। राजा बहोत ही प्रसन्न हुए। राजा को सारे सवाल के जवाब मिल गए थे। राजा ने छोटी सी लड़की देवशेना को अपने गुरुपद पे स्थायी करके उसकी जयजय कार की।


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Tuesday, 11 April 2017

motivation poem of Harivansh rai bachchan

Motivation poem of Harivansh rai bachchan 

motivation poem of Harivansh rai bachchan


हरों से डर के नौका पार नहीं होती,
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

नन्ही चींटी जब दाना लेके चलती है
चढ़ती दीवारों पे सौ बार फिसलती है

मन का विश्वास रंगो में साहस भरता है
चढ़ कर गिरना गिर कर चढ़ना ना अखरता है

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नही होती
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

डुबकियां सिंधू में गोताखोर लगता है

डुबकियां सिंधू में गोताखोर लगता है
जा जा के खाली हाथ लौटकर आता है

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
मुठी उसकी खाली हर बार नही होती
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

असफलता एक चुनोती है इसे स्वीकार करो
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो

जब तक सफ़ल न हो नीद चैन को त्यागो तुम

जब तक सफ़ल न हो नीद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़कर ना भागो तुम

कुछ किया बिना ही जय जयकार नहीं होती
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

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Sunday, 12 February 2017

9 best भगवत गीता संदेश in hindi and english

जब कौरव और पांडव अपने हक की सम्पत्ति के लिए युद्ध के लिए तैयार हो गए और दोनों ही कुरूक्षेत्र के मैदान में आमने-सामने थे। तभी अर्जुन ने देखा, सामने युद्ध करने के लिए कौरवो की सेना में द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, कौरवो के बच्चे और सारे रिश्तेदार मौजूद थे।

कौरव और पांडव रिश्ते में चचेरे भाई थे। तभी अर्जुन का मन में साधु भाव प्रगत हुवा और अर्जुन ने निर्णय लीया की मुझे अपने चचेरे भाई, उनके परिवार और गुरुजनों को मार के ये संपत्ति नहीं चाहिए। मुझे यही भी नहीं मालूम के में ये संसार में कब तक रहूंगा? इससे अच्छा है कि हम पांडव भिक्षा मांग कर ही गुजारा कर ले।


अर्जुन ने धनुष-बाण छोड़ दिया। अर्जुन को इस हालत में देख, श्री कृष्णा ने कहा क्या हुवा? तब अर्जुन ने कहा में युद्ध नहीं करना चाहता। में अपने मन में उठ रहे विचार और अपने उद्देश्य से हार गया हूं। मुझे युद्ध नहीं करना.....

तभी कृष्णा शरीर में काल भगवान का प्रवेश हुवा और काल भगवान ने श्री कृष्णा के माध्यम से जो "गीता ज्ञान" दिया वो अर्जुन को युद्ध करने के लिए प्रेरित करने के लिए काफी था। वे गीता ज्ञान आज भी हमारे जीवन के लिए अनमोल वचन है। उसमे से मेरे पसंद के 9 best भगवत गीता के संदेश यहाँ lifeaurmoney की माध्यम से दे रहा हु।


1. जो हुवा वो अच्छे के लिये हुवा।
1.It happened that it happened for the best.

Best-Geeta-sar-sandesh-in-english-and-hindi


2. जो हो रहा है, वो भी अच्छे के लिए हो रहा है।
2.What is happening, it is happening for the best.


3. जो होगा वो भी अच्छा होगा।
3. Which will be good too.


4. तुम्हे क्या खोने का गम है?
4. The loss of what you have?


5. तुमने क्या सर्जन किया है, जो नष्ट हो गया?
5.What is the surgeon, which was destroyed?


6. तुम्हे जो मिला है, वे यही मिला है।
6. You've got, they've got at the moment.

7. तुमने जो दिया है, वो भी यही से दिया है, जो पहले से यही था।
7. You have that, they have been the same, which was the first.


8 जो आज तुम्हारा है, वो कल दूसरे का था और परसों किसी और का हो जायेगा।
8 is yours today, he was yesterday and the day after tomorrow someone else will be the second.


9 परिवर्तन ही संसार का नियम है।
9 Change is the law of the universe.

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Tuesday, 10 January 2017

घोड़े की नाल, Short moral story in hindi

Short moral story in hindi


एक पुरानी बात है। एक नगर में एक व्यपारी रहता था। व्यपार(Business) करने के कारण उसे कई बार पास के शहर जाना पड़ता था। इस लिए वो बैलगाड़ी का use करता था।

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एक दिन की बात है, व्यपारी शहर में ऐसे ही घूम रहा था ऐसे में उसकी नजर एक घोड़े बेचने वाले पे पड़ी। उसने सोचा की, बैलगाड़ी में सफ़र करने से बहोत ही time west हो जाता है। इस से अच्छा है, में एक अच्छा सा घोड़ा खरीद लू तो मेरा समय भी बचे और सफ़र भी आराम से कटे।



उसने घोड़े वाले से भावताल करके एक अच्छा सा घोडा खरीद लिया। जाते जाते व्यपारी ने घोड़े वाले से पूछा की ये घोडा मुझे लंबे समय तक मेरा साथ दे इस लिए मुझे इनकी किस तरह से देखभाल करनी चाहिए?

घोड़े वाले ने कहा, घोड़े की अच्छी तरह देखभाल के लिए घोड़े को अच्छा सा घास और भरपूर मात्रा में चने खिलाना चाहिए और घोड़े के पैर की नाल हमेशा अच्छी तरह कसी हुई रखनी चाहिए।

दिन बीतने लगे, अब तो व्यपारी घोड़े पर ही सफ़र का मजा लेता था। लेकिन एक दिन जब वो घोड़े को लेके शहर जा रहा था तो उसे लगा की घोड़े के नाल थोड़ी सी ढ़ीली हो गई है। व्यापारी ने सोचा की अभी घोडा चल रहा है तो चलने दो, आगे देखा जायेगा।

"कल करे सो आज कर, आज करे सो अब"

थोड़ी देर बाद घोड़े की चाल धीरे धीरे धीमी होती चली गई। ऐसे में अचानक लुटेरों ने व्यापारी का पीछा किया लेकिन घोड़ा ठीक तरह चल नही पाने के कारण लुटेरों ने उस के पास का सारा सामान और पैसे लूट लिए।



व्यपारी का बहोत ही बुरा हाल हो गया था। वो अपनी क़िस्मत पे रोने लगा। तभी उसे ख़याल आया की अगर मेने पहले ही घोड़े की नाल ठीक करवा ली होती तो मेरा समान और पैसे बच जाते, मुझे ऐसा दिन न देखना पड़ता।

इस moral कहानी से ये सिख मिलती है अगर हम कोई काम को समयसर पूरा करने के बदले उसे टालते रहते है तो हमे मुश्केली का सामना कर पड़ सकता है। इस लिए तो कहा जाता है कि, "कल करे सो आज कर, आज करे सो अब"

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