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Wednesday, 2 December 2015

सही समय पे बोलना

हम चुप होते है तो हमारी कई समस्या का solution हो जाता है। लेकिन हम बोल-बोल के हमारी समस्या को और भी उलजा देते है। फिर भी ऐसा नहीं है की हम बोलने से  ही समस्या को उलजा देते है। लेकिन कई बार एसा होता है की हमे जब बोलना जरुरी होता है तब हम नहीं बोलते और समस्या है उनसे कही ज्यादा कठिन हो जाती है।
Sahi samay pe bolna

personality development  के रदी में फेकने वाली books पढ़-पढ़ के कोई व्यक्ति उन्नति के शिखर में नहीं पहुच सकता। एक रहस्य है की जो लोग smart है उसे कोई personality development की books पढ़ने की जरुरत नहीं है। और जो smart less वो जितनी भी personality development की books पढ़ेंगे वो वही के वही रहेगे। आज कल ऐसी books का बाजार बहुत ही गरम है। experience किसी को नहीं लेना सब को readymade  guidance ही  चाहिए। हमे जो interview में कैसे कपडे और जूते use करने है इसके लिए भी guidance की जरुरत पड़ती है तो हम interview में पास होने के लायक नहीं है। personality development के books कहेगा इतना ही बोलना है और इतना ही चुप रहना है तो आपकी कोई उन्नति नहीं है।
कब बोलना,कितना बोलना,कैसे बोलना ये सब व्यक्ति और परिस्थिति पे आधारित है। सामने वाला कोन है उसकी image क्या है ये सब जानके ही बोलना और चुप रहने का फैसला करना चाहिये। परिस्थिति एक ही होती है लेकिन कभी बोलना जरुरी होता है तो कभी चुप भी रहना जरुरी होता है ये फैसला तो हमको अपनी समज से ही लेना होगा।
सही समय पे कही गई बात का प्रभाव special होता है। या तो सही समय पे अपनी बात बोल दो या फिर अपनी बात बोलने का सही समय का निर्माण करे। life में ऐसा कईबार होता है की जब कोई खास बात बोलनी होती तब बोल नहीं सकते,उस पल हम को ये बात याद ही ना आई और याद आई तो शर्मकेमारे हम बोल ही न पाये।सच्ची बात करने से दर लगा,या जन्मजात संस्कार बिच में आये हो। हमारी बात मन में ही रह गई इस लिए हमने कुछ खोया भी हो।
Life ऐसा हुवा होगा की हम ने ग़ुस्से में आके कुछ बोल दिया हो,दिल में दबाई हुई आग को गलत समय पे निकाला होगा और उस समय पे हम सच होने पर हम को ignore किया होगा।जब हम future में ऐसी घटनाओं को याद करते है तो हम को ही लगता है की मेने ऐसे बोला ना होता तो अच्छा होता।
यहाँ पे जो बात है वो सिर्फ़ आर्थिक लाभ या आर्थिक नुकसान की नहीं। but, हमारी personality, हमारी relationship, हमारी family life और हमारी morality जेसी हरेक विषय की फायदे नुकसान की बात है। "एक ही बोल पुराने से पुराने रिस्तो को तोड़ देता है और एक ही बोल पुराने से पुराने रिस्तो को फिर से जोड़ देता है।"
हम सिर्फ बोलने का या चुप रहने का महत्व ही जानेगे तो नहीं चलेगा। क्या बोलना,कब बोलना,कैसा बोलना और कितना बोलना ये भी मालूम होना चाहिए।
कई बार सामने वाली व्यक्ति हम पे नाराज या गुस्सा होंगे या मेरी बात को स्वीकार नहीं करेगे ऐसे दर से हम अपनी बात बोलते ही नहीं। confidence से,  सावधानी से और विवेक से सच्ची बात , दिल की बात सही समय बोल ही देनी चाहिये। ऐसा भी हो के हम बोले और तुरन्त ही चमत्कार हो और हमारी मुराद पूरी हो जाये ! सिर्फ न बोलने से एक अच्छी तक चली जाये तो lifetime रोना पड़ता है।
love propose करना हो,कोई अन्याय का विरोध करना हो,हमारे ऊपर के अधिकारी से सच्ची बात करनी हो या घर के बुजर्ग को कोई बात समजानी हो हमें कभी भी हमारी जीभ का control खोना नहीं चहिये।

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