Tuesday, 11 April 2017

motivation poem of Harivansh rai bachchan

Motivation poem of Harivansh rai bachchan 

motivation poem of Harivansh rai bachchan


हरों से डर के नौका पार नहीं होती,
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

नन्ही चींटी जब दाना लेके चलती है
चढ़ती दीवारों पे सौ बार फिसलती है

मन का विश्वास रंगो में साहस भरता है
चढ़ कर गिरना गिर कर चढ़ना ना अखरता है

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नही होती
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

डुबकियां सिंधू में गोताखोर लगता है

डुबकियां सिंधू में गोताखोर लगता है
जा जा के खाली हाथ लौटकर आता है

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
मुठी उसकी खाली हर बार नही होती
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

असफलता एक चुनोती है इसे स्वीकार करो
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो

जब तक सफ़ल न हो नीद चैन को त्यागो तुम

जब तक सफ़ल न हो नीद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़कर ना भागो तुम

कुछ किया बिना ही जय जयकार नहीं होती
कौशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

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